In the dance of destruction, the seeds of creation are found.
विनाश के नृत्य में ही सृजन के बीज छिपे होते हैं
भगवान शिव 'महादेव' हैं, जो संहार के माध्यम से पुनरुद्धार करते हैं। वे वैराग्य और गृहस्थी के अद्भुत संगम हैं। शिव जी का स्वरूप निराकार ब्रह्म का साकार रूप है; उनकी जटाओं से बहती गंगा ज्ञान की शुद्धि और मस्तक पर चंद्रमा मन की शांति का प्रतीक है। वे 'भोलेनाथ' हैं, जो भक्त की सच्ची पुकार पर सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं।