धुन : जाग नी फकीरिये जगान वाले आ गए, गुरदास मान
पद : गल मेरी तू सुणलै झल्लिए हुण ता एथे आ गइयों तू फेर पता नही औणा मुड़ मुड़ के एह मानस चोला हथ तेरे नही औणा छड झमेले सारे जग दे लाभ जे पूरा उठौणा मन दा मणका फेर "मधुप" जे प्रेम हरि दा पौणा
राधा राधा जपलै नी पार लग जाएंगी नाम वाले बेड़े बैठी भव तर जाएंगी