Bhajan भजन

आया हु जग से हार मुझको अपनाले

Krishna श्री कृष्ण
Lyrics बोल

आया हु जग से हार मुझको अपनाले
मेरी हार को कर स्वीकार मुझको अपनाले

दर तेरा आखरी है दुनिया बताती है
बिगड़ी से बिगड़ी किस्मत यहां बन जाती है
सच्ची है तेरी सरकार मुझको अपना ले

संकटों में उलझा मेरा हर एक रिश्ता है
इससे उबारने का तू ही एक फरिस्ता है
संकट मूझपे है हजार मुझको अपना ले

कोई कहे साथी माझी कोई दीनानाथ है
श्याम कहे बाबा मेरे कोई न साथ है
देकर थोड़ा सा प्यार मुझको अपना ले

लेखक श्याम अग्रवाल जी

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