The axe of justice falls when the crown becomes a curse.
जब मुकुट अभिशाप बन जाता है, तब न्याय का परशु गिरता है।
भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं और एक 'ब्रह्म-क्षत्रिय' के रूप में पूजनीय हैं, जिनमें ब्राह्मण का तप और क्षत्रिय का शौर्य दोनों समाहित हैं। उन्होंने भगवान शिव से प्राप्त 'परशु' से अभिमानी राजाओं का अंत कर पृथ्वी को अधर्म से मुक्त कराया। वे आज भी महेंद्र पर्वत पर तपस्यारत माने जाते हैं और ज्ञान के साथ शस्त्र के महत्व को दर्शाते हैं।