In the absence of the self, love becomes divine.
जहाँ अहंकार का अंत होता है, वहीं से दिव्य प्रेम की शुरुआत होती है।
श्री राधा जी भगवान कृष्ण की 'ह्लादिनी शक्ति' और उनके प्राणों का आधार हैं। उनका प्रेम काम-वासना से रहित शुद्ध आध्यात्मिक मिलन है। राधा जी भक्ति मार्ग की वह सर्वोच्च गुरु हैं, जो भक्त का हाथ पकड़कर उसे कृष्ण के चरणों तक ले जाती हैं। उनके बिना कृष्ण भी अपूर्ण माने जाते हैं।