राम वनों को जाता री माता
ये ले री मैया अपने कीर्ती और कुंडल, राम जटा रखाता री माता
ये ले मैया वस्त्र आभूषण, राम तो भस्म रमाता री माता
जिन्दे रहे तो मैया फेर मिलेंगे, राम तो सीस झुकाता री माता
स्वर - धर्माचार्य पूज्य श्री अशोक कृष्ण ठाकुर जी