सेठ मारो मंडपिया वालो रे
सेठ मारो मुरली वालो रे
सेठ मारो भाग्य सुधारे वो
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो वो
श्याम रंग सूरतिया प्यारी मुरली मन में बजी
राजा हो या रंक कोई सबका मनडा में तू ही
सेठ मारो मंडपिया वालो रे
श्याम मारो मुरली वालो रे
सेठ मारो भाग्य संवारे वो
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो
मन्नत मांगे जो भी सांवरिया पल में पूरी करदी
खाली हाथ ना कोई जावे सब की झोलिया भरदी
सेठ मारो मंडपिया वालो रे
श्याम मारो मुरली वालो रे
सेठ मारो भाग्य संवारे वो
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो
भोलाराम जी के सपने आया तीन मुरता दिखी
बागुंड का कांकड़ में भगतां तीन मुरता निकली
सेठ मारो मंडपिया वालो रे
श्याम मारो मुरली वालो रे
सेठ मारो भाग्य संवारे वो
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो
तीन मूरत में एक ही सूरत एक मंडपिया में बैठी
महावीर भजना में गावे सुनलो कृष्ण मुरारी।
सेठ मारो मंडपिया वालो रे
श्याम मारो मुरली वालो रे
सेठ मारो भाग्य संवारे वो
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो