Aarti आरती

आरती कीजै श्रीनटवर जी की

Krishna श्री कृष्ण
Aarti आरती

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

नन्द-सुवन जसुमतिके लाला, गोधन गोपी प्रिय गोपाला।
देवप्रिय असुरनके काला, मोहन विश्वविमोहन वर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

जय वसुदेव-देवकी-नन्दन, कालयवन-कन्सादि-निकन्दन।
जगदाधार अजय जगवन्दन, नित्य नवीन परम सुन्दर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

अकल कलाधर सकल विश्वधर, विश्वम्भर कामद करुणाकर।
अजर, अमर, मायिक, मायाहर, निर्गुन चिन्मय गुणमन्दिर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

पाण्डव-पूत परीक्षित रक्षक, अतुलित अहि अघ मूषक-भक्षक।
जगमय जगत निरीह निरीक्षक, ब्रह्म परात्पर परमेश्वर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

नित्य सत्य गोलोकविहारी, अजाव्यक्त लीलावपुधारी।
लीलामय लीलाविस्तारी, मधुर मनोहर राधावर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की, गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥
आरती कीजै श्रीनटवर जी की, गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

आरती कीजै श्रीनटवर जी की।
गोवर्धन-धर बन्शीधर की॥

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