धुन- आरती कुंज बिहारी की
आरती असुर निकंदन की।
पवनसुत केशरी नंदन की ।।
1.ज्ञान के सागर हैं हनुमंत।
पड़े पद युगल उपासक संत।
कमल हिय राजै सिय-भगवंत ।।
परमप्रिय-2
परमप्रिय भक्त शिरोमणि की ।।
पवन सुत केशरी नंदन की ।।
आरती असुर निकंदन की।
पवनसुत केशरी नंदन की ।।
2.सीय-रघुवर के तुम प्यारे।
साधु-संतन के रखवारे।
असुर कुल के तुम संहारे।
परमबल-2
परम बलवान शिरोमणि की ,
पवन सुत केशरी नंदन की ।।
आरती असुर निकंदन की।
पवनसुत केशरी नंदन की ।।